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उपलब्धियां

 

राष्ट्रीय पर्यावरणीय अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), नागपुर वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), नई दिल्ली का एक संघटक है और चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई में पांच क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं सहित इसकी उपस्थिति देश भर में है। नीरी का अधिदेश है:

  • पर्यावरणीय विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में अनुसंधान एवं विकासात्मक अध्ययन आयोजित करना
  • वैज्ञानिक एवं प्रोद्योगिकीय मध्यवर्तनों के माध्यम से पर्यावरणीय प्रदूषण की समस्याओं का समाधान करने में क्षेत्र के उद्योगों, स्थानीय निकायों इत्यादि को सहायता प्रदान करना
  • पारस्परिक लाभ के लिए पर्यावरणीय विज्ञान एवं अभियांत्रिकी पर शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के साथ वार्तालाप करना और सहयोग बनाना
  • सीएसआईआर की महत्वपूर्ण क्षेत्रों और राष्ट्रीय अभियान परियोजनाओं में भाग लेना

अनुसंधान एवं विकास के महत्वपूर्ण क्षेत्र

पर्यावरणीय अनुवीक्षा, पर्यावरणीय प्रतिरूपण, अनुकूलन, पर्यावरणीय प्रभाव और जोखिम मूल्यांकन, पर्यावरणीय नीति, पर्यावरणीय जैविक प्रोद्योगिकी, जीनोमिक्स और वायरोलॉजी, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जल एवं अपशिष्ट जल प्रोद्योगिकियां, ठोस एवं हानिकारक अपशिष्ट प्रबंधन, और पर्यावरणीय पदार्थ।

 

वर्तमान गतिविधियाँ:

सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरणीय अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) ने देश में प्रभावकारी रूप से पर्यावरणीय अनुवीक्षा के लिए 12 वीं पंच वर्षीय योजना के अधीन कई अनुसंधान एवं विकास गतिविधियाँ आरंभ की है, जिसमे कुछ अभियान परियोजनाएं शामिल है जैसे कि “राष्ट्रीय स्वच्छ वायु अभियान”, “स्वच्छ जल: सतत विकल्प”, “अपशिष्टों का उपयोग और प्रबंधन (सीओई)” और “स्टॉकहोल्म कन्वेंसन के अधीन स्थाई जैविक प्रदूषण (पीओपी) का परिमाणन एवं न्यूनीकरण”। इसके अलावा देश में प्रचलित सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति के अनुकूल लागत-प्रभावी एवं संसाधन बहाली पर आधारित प्रोद्योगिकियों के विकास के माध्यम से पर्यावरणीय समाधान प्रदान के लिए विभिन्न अनुसंधान एवं विकास गतिविधियां प्रगति में है।

सीएसआईआर-नीरी ने जल प्रदूषण का नियंत्रण, वायु प्रदूषण नियंत्रण और अपशिष्ट से धन के अर्थों में भारत के ग्रामीण लोगों के हित के लिए सीएसआईआर-800 कार्यक्रम के अधीन परिणाम द्वारा संचालित महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों की पहल आरंभ की है। संस्थान पर्यावरणीय सामग्रियों का विकास करने का प्रयास कर रहा है जो पर्यावरणीय प्रदूषण की रोकथाम में महत्वपूर्ण होगी। संस्थान ने वातावरण में CO2 की बढ़ती स्तर घटाने के लिए कार्बनडाईऑक्साइड के प्रच्छादन और मूल्यस्थिरीकरण से संबंधित आर एवं डी (अनुसंधान एवं विकास) गतिविधियाँ आरंभ की है। मिसाल के रूप में, सीएसआईआर-नीरी देश में सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए पारंपरिक पर्यावरणीय प्रभाव और जोखिम आंकलन के बजाय क्षमता पर आधारित विकासात्मक योजना पर ध्यान केन्द्रित करने के प्रति कटिबद्ध है। संस्थान सरकार, उद्योग और समाज द्वारा सामना की जा रही भिन्न समस्याओं के कई समाधान देना जारी रखेगा। संस्थान प्रोद्योगिकी विकास एवं अंतरण, अनुसंधान प्रकाशन, एकस्वकृत, शैक्षणिक संस्थानों और भारत और विदेश की आर एवं डी संस्थानों के साथ नेटवर्किंग के अर्थों में अपनी परिणाम द्वारा संचालित आर एवं डी गतिविधियाँ भी जारी रखेगा।

 

उपलब्धियां
सीएसआईआर-नीरी ने सफलता पूर्वक दो प्रोद्योगिकियों का अंतरण कर लिया है, अर्थात एमएसएमई के 15 उद्योगपतियों को फाईटोरिड अपशिष्ट जल उपचार प्रोद्योगिकी और एमएसएमई के 9 उद्योगपतियों को सौर विद्युत अपघटनी फ्लोराइड निष्कासन प्रोद्योगिकी।

सीएसआईआर-नीरी ने प्रोद्योगिकी के अंतरण/ आर एवं डी परियोजनाओं के कार्यान्वयन/ शैक्षणिक सहयोग के लिए विभिन्न अभिकरणों/ संगठनों के साथ कई सहमतियों में प्रवेश किया है।
सीएसआईआर-नीरी ने सी-डैक कोलकाता के सहयोग से “इलेक्ट्रॉनिक नोज़ (ई-नोज़)” विकसित किया है, जिसमे आयातित “ई-नोज़” का स्थान लेने की क्षमता है। इस ई-नोज़, जिसमे सेंसरों (धातु ऑक्साइड) की 8 ऐरे है, पल्प और कागज़ उद्योग, चर्म शोधन और डिस्टिलरी उद्योग में सल्फर के गंध की अनुवीक्षा करने में उपयोगी है। संस्थान ने मेसर्स महिंद्रा वाहन विनिर्माण लिमिटेड (एमवीएमएल), पुणे को उच्च दर प्रस्वेदन प्रणाली के उपयोग से इसके अपगामी जल के उपचार और सुरक्षित रूप से निपटान के लिए एक प्रोद्योगिकीय समाधान प्रदान किया है। मेसर्स एमवीएमएल, पुणे ने संस्थान द्वारा बनाई गई एचआरटीएस मॉडल को क्षेत्र में लागू भी किया था। एचआरटीएस की डिज़ाइन में फिल्टर माध्यम शामिल है जो प्रदूषकों को थामने के लिए अधिक सतही क्षेत्र प्रदान करता है और साथ ही अपशिष्ट जल में तैरते हुए ठोस पदार्थों को भी निकालता है।

सीएसआईआर-नीरी के प्रोद्योगिकी के आधार पर विनिर्मित चाँपाकल संलग्न योग्य लौह निष्कासन (आईआर) संयंत्र को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा राजनंदगाँव, दुर्ग और कांकेर जिलाओं के 66 स्थानों में स्थापित किया गया था। इन संयंत्रों ने जल में लौह की सांद्रता 3-8 मिलीग्रा/लीटर से 0.1 मिलीग्रा/लीटर से भी कम मूल्य तक घटाने में सहायता की है।

प्रत्येक संयंत्र की क्षमता लगभग 1000 लीटर/घंटा है। दुर्दम्य रसायन उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट जल के प्रभावी उपचार के लिए सीएसआईआर-नीरी द्वारा विकसित इलेक्ट्रो-ऑक्सीडेशन प्रोद्योगिकी का कार्यान्वयन आरंभिक मान पर नंदेसरी उद्योग संघ, वड़ोदरा में किया गया था। अत्यंत दुर्दम्य रसायन उद्योग के अपशिष्ट जल के उपचार के लिए सीएसआईआर-नीरी द्वारा विकसित प्रोद्योगिकी के आधार पर भारत में अब तक की पहली सीईटीपी मान की इलेक्ट्रो ऑक्सीडेशन संयंत्र बनाई गई है। यह प्रोद्योगिकी निम्न पद चिन्ह क्षेत्र (4 मीटर x 4 मीटर प्रति रिएक्टर) सहित अपशिष्ट जल प्रवाह नियमों (250 मिलीग्रा/लीटर की सीओडी) पूरी करने में सहायता प्रदान करती है और इसे स्थापित करना और चलाना आसान है और यह लागत-प्रभावी भी है।

सीएसआईआर-नीरी ने वहन क्षमता पर आधारित विकासात्मक परियोजनाएं भी आरंभ की है जैसे कि “संबलपुर-झारसुगुड़ा क्षेत्र, ओडिशा में प्रस्तावित विकास के लिए वहन क्षमता पर आधारित विनियोजन”; “पर्यटक प्रभाव आंकलन और विश्व धरोहर स्थलों – ताज महल, आगरा और अजंता गुफाओं, औरंगाबाद की पर्यावरणीय सुरक्षा हेतु वहन क्षमता अध्ययन”। संस्थान ने उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर सरकार दोनों को नीरी-जेडएआर की 100 जल निस्यन्दकें प्रदान की ताकि बाढ़ से प्रभावित लोगों को पीने के लिए सुरक्षित पानी उपलब्ध करवाया जा सके। एक बहु-ईंधन घरेलु रसोई चूल्हे का विकास किया गया है और इसके उच्च तापीय दक्षता एवं निम्नतम उत्सर्जन की परीक्षा की गई है। गाँव की महिलाओं ने इस उत्पाद के प्रति प्रेरणाजनक अनुक्रिया दिखाई है।

लघु एवं मध्यम मान के उद्योगों में अनुप्रयोग के लिए विषैली पदार्थों के उत्सर्जन की अनुवीक्षा और चिमनी के धुंए के उपचार के लिए एक गतिशील प्रयोगशाला का विकास किया गया है।

फसलों के लिए जल परियोजना के अधीन जल पुनश्चक्रण एवं पुनः उपयोग हेतु नवाटेक प्राकृतिक जल प्रोदोगिकियां (पुणे में दो और नागपुर में दो क्षेत्र प्रदर्शन) और फाईटोरेमीडिएशन प्रोद्योगिकी (तीन क्षेत्र प्रदर्शन) पर कार्यान्वयन प्रगति में है।

अपशिष्ट से ऊर्जा पर 12 वीं पंच वर्षीय योजना के परियोजनाओं की प्रक्रियाओं एवं उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक प्रोद्योगिकी उद्यान वर्तमान निर्माण चरण के अधीन है।

 

प्रदर्शित की गई प्रोद्योगिकियां

  • दुर्दम्य रसायन उद्योग से निकलने वाले अपशिष्ट जल के प्रभावी उपचार के लिए नंदेसरी उद्योग संघ, वड़ोदरा में आरंभिक मान पर इलेक्ट्रो-ऑक्सीडेशन प्रोद्योगिकी को कार्यान्वित किया गया।
  • मेसर्स महिंद्रा वाहन विनिर्माण लिमिटेड (एमवीएमएल), पुणे अपगामी जल के उपचार और सुरक्षित रूप से निपटान के लिए कंपनी को उच्च दर प्रस्वेदन प्रणाली के उपयोग से प्रोद्योगिकीय समाधान प्रदान की गई।

सामाजिक परियोजनाएं

  • एक सामाजिक अभियान के भाग के रूप में, संस्थान में विकसित प्रोद्योगिकी के आधार पर, सौर ऊर्जा पर आधारित विद्युत अपघटनी फ्लोराइड निष्कासन संयंत्र का निर्माण किया गया है और नागपुर शहर से लगभग 100 किमी दूर ग्राम डोंगरगाँव के निकट अवस्थित महाराष्ट्र राज्य खनन निगम के फ्लोराईट खदान पर इसकी शुरुआत की गई है। यह संयंत्र जिसकी निर्धारित क्षमता 600 लीटर/बैच है, फ्लोराईट खदान के श्रमिकों को फ्लोराइड से मुक्त सुरक्षित जल प्रदान कर रही है।
  • संस्थान ने हैदराबाद शहर के लिए यूएस ईपीए की सहायता से जल सुरक्षा योजना विकसित कर लिया है और संस्थान ने मध्य प्रदेश में यूएनआईडीओ की सहायता से भूरा जल पुनश्चक्रण का प्रदर्शन विस्तृत रूप से किया है। नीरी ने ग्रामीण समुदायों के लिए नीम्बू जाती के फलों के छिलकों से अनिवार्य तेल निकालने के लिए एक प्रक्रिया तैयार की है।
  • ठोस ईंधन को जलाने पर निकलने वाले सीओ, वीओसी और पीएम को नियंत्रित करने के लिए कई निम्न-लागत उत्प्रेरकों का विकास और संश्लेषण किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आतंरिक वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की दृष्टि से सीओ, वीओसी और पीएम के ऑक्सीडेशन के प्रति इन उत्प्रेरकों की प्रतिक्रियाओं के अनुसार इन्हें वर्गीकृत और मूल्यांकित किया गया है।
  • नीरी ने भूजल में फ्लोराइड के संक्रमण को न्यूनीकृत करने और घरेलू कार्यों में इसके उपयोग के लिए सतत उपचार प्रक्रिया बनाया और इसका विकास किया है। देश के भिन्न स्थानों पर चाँपाकल के साथ संलग्न योग्य लौह निष्कासन संयंत्रों का विकास किया गया और स्थापित किया गया था।