वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक घटक प्रयोगशाला
(विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संगठन)
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पर्यावरणीय बुद्धिमत्ता सतत विकास को रूपांतरित कर रही है। यह उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता ह्रास जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रदान करती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), रिमोट सेंसिंग (RS), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा ड्रोन जैसी तकनीकों के साथ एकीकृत कर यह प्रणाली वास्तविक समय के डेटा, सटीक पूर्वानुमान तथा व्यापक समाधान उपलब्ध कराती है।
पारंपरिक पद्धतियों की तुलना में AI आधारित प्रणालियाँ अधिक सटीकता और दक्षता प्रदान करती हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय एवं प्रभावी पर्यावरण प्रबंधन संभव होता है। वायु और जल गुणवत्ता की निगरानी से लेकर अपशिष्ट प्रबंधन के अनुकूलन तथा जैव विविधता संरक्षण तक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के तरीकों को नया स्वरूप दे रही है। अनुसंधान संस्थानों, शासकीय संगठनों तथा उद्योगों के बीच सहयोग इन नवाचारों को और सशक्त बना रहा है, जो एक सतत भविष्य के निर्माण की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
निरंतर निवेश और नीतिगत समर्थन के साथ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है, जिससे पृथ्वी के संसाधनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए सुनिश्चित किया जा सके।
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा उपग्रह चित्रों सहित उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए पर्यावरणीय मानकों की 24×7 उच्च-रिज़ॉल्यूशन निगरानी, पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण तथा स्वचालित प्रतिवेदन प्रणाली को सक्षम बनाना।”
“कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से पर्यावरणीय डेटा को उपयोगी अंतर्दृष्टि में तथा उन अंतर्दृष्टियों को पूर्वानुमान आधारित कार्यों में परिवर्तित कर सतत एवं प्रत्यास्थ पर्यावरण के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाना।”
उदाहरण: AI किफायती IoT आधारित जल सेवा वितरण प्रणालियों को सक्षम बना रहा है, जैसे “गाँव का पानी गाँव में – हर घर को नल से साफ जल” पहल, जिसमें स्मार्ट सेंसर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल गुणवत्ता एवं वितरण की निगरानी की जाती है।
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