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CSIR - NATIONAL ENVIRONMENTAL ENGINEERING RESEARCH INSTITUTE

सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की एक घटक प्रयोगशाला

(विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संगठन)

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हमारे बारे में
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क्षेत्रीय केंद्र
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विभाजन
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केंद्र
उन्नत पर्यावरणीय विश्लेषणात्मक केंद्र पर्यावरणीय बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल प्रणालियों का केंद्र औद्योगिक पारिस्थितिकी एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था केंद्र पारिस्थितिक तंत्र एवं प्रत्यास्थता अभिकल्प केंद्र
प्रशासन
निदेशक एवं सचिवालय
सामान्य प्रशासन
प्रशासन नियंत्रक और सचिवालय प्रशासन अध‍िकारी का कार्यालय बिल अनुभाग स्थापना अनुभाग भर्ती एवं मूल्यांकन अनुभाग सामान्‍य अनुभाग राजभाषा एकक डायरी प्रेषण सतर्कता अनुभाग
वित्‍त एवं लेखा अध‍िकारी भंडार एवं क्रय अनुभाग सुरक्षा
एस एंड टी प्रबंधन
व्यवसाय विकास एवं परियोजना प्रबंधन इकाई
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आईपीआर कर्मचारी पेटेंट/कॉपीराइट
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मानव संसाधन विकास
इंटर्नशिपभर्तीए सी एस आई आर
अंतरराष्ट्रीय मामले
स्टॉकहोम कन्वेंशन डब्ल्यूएचओ आईपीसीसी यूएनईपी यूनिडो
इको इनोवेशन
नीरी जैव विविधता लिविंग लैब स्मृति वन बांस्या वन सतत नवाचार
अभिलेखागार
पुरालेख प्रकाशन पुरालेख वार्षिक प्रतिवेदन पुरालेख चलचित्र प्रदर्शनी पुरालेख पेटेंट पुरालेख कार्यक्रम पुरालेख समाचार पुरालेख पूरी हो चुकी परियोजनाएं पुरालेख निविदा पुरालेख परिपत्र और आदेश विवरणिका
सीएसआईआर-नीरी परिसर
सीएसआईआर-नीरी परिसर Image
सीएसआईआर-नीरी परिसर
सीएसआईआर-नीरी ने आज प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को वास्तविक समय में वाहन प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान हेतु उसके वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एआई डैशबोर्ड के संबंध में अवगत कराने के लिए एक प्रेस सम्मेलन आयोजित किया।
सीएसआईआर-नीरी ने आज प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को वास्तविक समय में वाहन प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान हेतु उसके वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एआई डैशबोर्ड के संबंध में अवगत कराने के लिए एक प्रेस सम्मेलन आयोजित किया। Image
सीएसआईआर-नीरी ने आज प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को वास्तविक समय में वाहन प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान हेतु उसके वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एआई डैशबोर्ड के संबंध में अवगत कराने के लिए एक प्रेस सम्मेलन आयोजित किया।
सीएसआईआर-नीरी ने 9 मार्च 2026 को नीरी सभागार में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया
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सीएसआईआर-नीरी ने 9 मार्च 2026 को नीरी सभागार में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन किया
डॉ. पारुल ऋषि ने सीएसआईआर-नीरी में जलवायु परिवर्तन के व्यवहारिक विज्ञान एवं मिशन लाइफ विषय पर आमंत्रित व्याख्यान दिया।
डॉ. पारुल ऋषि ने सीएसआईआर-नीरी  में जलवायु परिवर्तन के व्यवहारिक विज्ञान एवं मिशन लाइफ विषय पर आमंत्रित व्याख्यान दिया। Image
डॉ. पारुल ऋषि ने सीएसआईआर-नीरी में जलवायु परिवर्तन के व्यवहारिक विज्ञान एवं मिशन लाइफ विषय पर आमंत्रित व्याख्यान दिया।
सीएसआईआर-नीरी दिल्ली क्षेत्रीय केंद्र (डीआरसी) द्वारा दिल्ली में स्थापित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीईटीपी) के संचालन एवं प्रबंधन के लिए उत्तरदायी 11 सीईटीपी सोसायटियों के अधिकारियों के साथ एक प्रारंभिक (किक-ऑफ) बैठक आयोजित की गई।
सीएसआईआर-नीरी दिल्ली क्षेत्रीय केंद्र (डीआरसी) द्वारा दिल्ली में स्थापित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीईटीपी) के संचालन एवं प्रबंधन के लिए उत्तरदायी 11 सीईटीपी सोसायटियों के अधिकारियों के साथ एक प्रारंभिक (किक-ऑफ) बैठक आयोजित की गई। Image
सीएसआईआर-नीरी दिल्ली क्षेत्रीय केंद्र (डीआरसी) द्वारा दिल्ली में स्थापित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (सीईटीपी) के संचालन एवं प्रबंधन के लिए उत्तरदायी 11 सीईटीपी सोसायटियों के अधिकारियों के साथ एक प्रारंभिक (किक-ऑफ) बैठक आयोजित की गई।
डॉ. विनय के. नंदीकोरी, निदेशक, CSIR-सीसीएमबी ने सीएसआईआर-नीरी के अपने भ्रमण के दौरान डॉ. एस. वेंकट मोहन, निदेशक, सीएसआईआर-नीरी के साथ संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की।
डॉ. विनय के. नंदीकोरी, निदेशक, CSIR-सीसीएमबी ने सीएसआईआर-नीरी के अपने भ्रमण के दौरान डॉ. एस. वेंकट मोहन, निदेशक, सीएसआईआर-नीरी के साथ संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की। Image
डॉ. विनय के. नंदीकोरी, निदेशक, CSIR-सीसीएमबी ने सीएसआईआर-नीरी के अपने भ्रमण के दौरान डॉ. एस. वेंकट मोहन, निदेशक, सीएसआईआर-नीरी के साथ संभावित सहयोग के क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की।
जी. एच. रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट, नागपुर के सिविल इंजीनियरिंग पॉलिटेक्निक के 59 विद्यार्थियों ने पर्यावरण अभियांत्रिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने हेतु सीएसआईआर-नीरी का दौरा किया।
जी. एच. रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट, नागपुर के सिविल इंजीनियरिंग पॉलिटेक्निक के 59 विद्यार्थियों ने पर्यावरण अभियांत्रिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने हेतु सीएसआईआर-नीरी का दौरा किया। Image
जी. एच. रायसोनी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट, नागपुर के सिविल इंजीनियरिंग पॉलिटेक्निक के 59 विद्यार्थियों ने पर्यावरण अभियांत्रिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने हेतु सीएसआईआर-नीरी का दौरा किया।
डॉ. पुनर्बसु चौधुरी, अध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा डॉ. सुबर्णा भट्टाचार्य, जादवपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विद्यालय से, ने सीएसआईआर-नीरी का दौरा किया।
डॉ. पुनर्बसु चौधुरी, अध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा डॉ. सुबर्णा भट्टाचार्य, जादवपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विद्यालय से, ने सीएसआईआर-नीरी का दौरा किया। Image
डॉ. पुनर्बसु चौधुरी, अध्यक्ष, पर्यावरण विज्ञान विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा डॉ. सुबर्णा भट्टाचार्य, जादवपुर विश्वविद्यालय के पर्यावरण अध्ययन विद्यालय से, ने सीएसआईआर-नीरी का दौरा किया।
श्री शिवाजी विज्ञान महाविद्यालय, अमरावती के बी.एससी. रसायन विज्ञान के 102 छात्रों ने सीएसआईआर-नीरी में विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान एवं पर्यावरणीय निगरानी पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
श्री शिवाजी विज्ञान महाविद्यालय, अमरावती के बी.एससी. रसायन विज्ञान के 102 छात्रों ने सीएसआईआर-नीरी  में विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान एवं पर्यावरणीय निगरानी पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। Image
श्री शिवाजी विज्ञान महाविद्यालय, अमरावती के बी.एससी. रसायन विज्ञान के 102 छात्रों ने सीएसआईआर-नीरी में विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान एवं पर्यावरणीय निगरानी पर अनुसंधान एवं विकास (R&D) का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया।
वरिष्ठ शहरी प्रशासनिक अधिकारी मध्य प्रदेश की प्रमुख पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के लिए संभावित विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) हस्तक्षेपों का पता लगाते हैं
वरिष्ठ शहरी प्रशासनिक अधिकारी मध्य प्रदेश की प्रमुख पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के लिए संभावित विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) हस्तक्षेपों का पता लगाते हैं Image
वरिष्ठ शहरी प्रशासनिक अधिकारी मध्य प्रदेश की प्रमुख पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के लिए संभावित विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) हस्तक्षेपों का पता लगाते हैं
सीएसआईआर-नीरी द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 का आयोजन मुख्य अतिथि डॉ. उमा रामकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिसमें जैव-विविधता, जीनोमिक्स एवं संरक्षण विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।
सीएसआईआर-नीरी द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 का आयोजन मुख्य अतिथि डॉ. उमा रामकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिसमें जैव-विविधता, जीनोमिक्स एवं संरक्षण विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। Image
सीएसआईआर-नीरी द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 का आयोजन मुख्य अतिथि डॉ. उमा रामकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ, जिसमें जैव-विविधता, जीनोमिक्स एवं संरक्षण विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।
सीएसआईआर-नीरी दिल्ली क्षेत्रीय केंद्र ने पर्यावरणीय सततता हेतु एआई-एमएल नवाचारों को प्रदर्शित करते हुए शारदा विश्वविद्यालय, आगरा के साथ छात्र–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया।
सीएसआईआर-नीरी  दिल्ली क्षेत्रीय केंद्र ने पर्यावरणीय सततता हेतु एआई-एमएल नवाचारों को प्रदर्शित करते हुए शारदा विश्वविद्यालय, आगरा के साथ छात्र–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया। Image
सीएसआईआर-नीरी दिल्ली क्षेत्रीय केंद्र ने पर्यावरणीय सततता हेतु एआई-एमएल नवाचारों को प्रदर्शित करते हुए शारदा विश्वविद्यालय, आगरा के साथ छात्र–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया।
क्यूसीआई-एनएबीईटी द्वारा सीएसआईआर-नीरी में तीन दिवसीय पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) क्षमता-विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न शासकीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की।
क्यूसीआई-एनएबीईटी द्वारा सीएसआईआर-नीरी में तीन दिवसीय पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) क्षमता-विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न शासकीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की। Image
क्यूसीआई-एनएबीईटी द्वारा सीएसआईआर-नीरी में तीन दिवसीय पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) क्षमता-विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न शासकीय एवं औद्योगिक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की।
सीआरपीएफ 206 कोबरा यूनिट, भंडारा अधिकारी वैज्ञानिक ठोस कचरा प्रबंधन समाधान का पता लगाने के लिए सीएसआईआर– नीरी का दौरा
सीआरपीएफ 206 कोबरा यूनिट, भंडारा अधिकारी वैज्ञानिक ठोस कचरा प्रबंधन समाधान का पता लगाने के लिए सीएसआईआर– नीरी का दौरा Image
सीआरपीएफ 206 कोबरा यूनिट, भंडारा अधिकारी वैज्ञानिक ठोस कचरा प्रबंधन समाधान का पता लगाने के लिए सीएसआईआर– नीरी का दौरा
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पर्यावरणीय बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल प्रणालियों का केंद्र

पर्यावरणीय बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल प्रणालियों का केंद्र

Staff

कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पर्यावरणीय बुद्धिमत्ता सतत विकास को रूपांतरित कर रही है। यह उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता ह्रास जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान प्रदान करती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), रिमोट सेंसिंग (RS), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा ड्रोन जैसी तकनीकों के साथ एकीकृत कर यह प्रणाली वास्तविक समय के डेटा, सटीक पूर्वानुमान तथा व्यापक समाधान उपलब्ध कराती है।

पारंपरिक पद्धतियों की तुलना में AI आधारित प्रणालियाँ अधिक सटीकता और दक्षता प्रदान करती हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय एवं प्रभावी पर्यावरण प्रबंधन संभव होता है। वायु और जल गुणवत्ता की निगरानी से लेकर अपशिष्ट प्रबंधन के अनुकूलन तथा जैव विविधता संरक्षण तक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के तरीकों को नया स्वरूप दे रही है। अनुसंधान संस्थानों, शासकीय संगठनों तथा उद्योगों के बीच सहयोग इन नवाचारों को और सशक्त बना रहा है, जो एक सतत भविष्य के निर्माण की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

निरंतर निवेश और नीतिगत समर्थन के साथ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है, जिससे पृथ्वी के संसाधनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए सुनिश्चित किया जा सके।

अधिदेश (उद्देश्य एवं दायित्व)

“कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तथा उपग्रह चित्रों सहित उन्नत प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हुए पर्यावरणीय मानकों की 24×7 उच्च-रिज़ॉल्यूशन निगरानी, पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण तथा स्वचालित प्रतिवेदन प्रणाली को सक्षम बनाना।”

  • मुख्य अधिदेश पहलू: वास्तविक समय निगरानी, पूर्वानुमानात्मक मॉडलिंग, नियामकीय अनुपालन
दृष्टि वक्तव्य (दीर्घकालिक प्रभाव)

“कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से पर्यावरणीय डेटा को उपयोगी अंतर्दृष्टि में तथा उन अंतर्दृष्टियों को पूर्वानुमान आधारित कार्यों में परिवर्तित कर सतत एवं प्रत्यास्थ पर्यावरण के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाना।”

  • मुख्य दृष्टि पहलू: प्रत्यास्थता एवं सततता, सक्रिय संरक्षण
अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्र
  • पर्यावरणीय बुद्धिमत्ता: वायु एवं जल गुणवत्ता प्रबंधन, अपशिष्ट क्षेत्र विश्लेषण तथा जैव विविधता संरक्षण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग का एकीकरण।
  • डिजिटल प्रौद्योगिकी: सतत पर्यावरणीय क्षेत्र के लिए डिजिटल ट्विन ढाँचे का विकास।
  • भू-स्थानिक विश्लेषण: भूमि उपयोग परिवर्तन का पता लगाने, शहरी विकास मॉडलिंग तथा बाढ़ संवेदनशीलता मानचित्रण हेतु RS एवं GIS अनुप्रयोग।
  • ड्रोन आधारित मानचित्रण एवं निगरानी: पर्यावरणीय निगरानी हेतु UAV/ड्रोन आधारित एम्बेडेड IoT प्रौद्योगिकी।
  • हाइड्रो-इन्फॉर्मेटिक्स: उन्नत जलवैज्ञानिक एवं जलगतिकीय मॉडलिंग (MIKE 21, MIKE Ecolab) तथा पर्यावरणीय जोखिम आकलन हेतु गणितीय एल्गोरिद्म।
प्रमुख सुविधाएँ
  • आईटी प्रणाली एवं नेटवर्क सर्वर प्रशासन: संस्थान में इंटरनेट कनेक्टिविटी तथा उच्च गति नेटवर्क अवसंरचना का प्रबंधन।
  • सॉफ्टवेयर विकास एवं अनुरक्षण: संस्थान के विभिन्न सॉफ्टवेयर प्रणालियों का विकास एवं रखरखाव।
  • बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली: संस्थान की बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली का संचालन एवं समर्थन।
  • CCTV निगरानी प्रणाली: कॉलोनी एवं कार्यालय परिसर की सुरक्षा हेतु CCTV प्रणाली का प्रबंधन।
  • नीरी केंद्रीकृत प्रदर्शन प्रणाली: संस्थान की प्रमुख गतिविधियों एवं कार्यक्रमों का प्रदर्शन।
  • मानव संसाधन गतिविधियों हेतु सर्वर: वैज्ञानिक एवं तकनीकी कर्मियों की भर्ती तथा परियोजना सहायकों के प्रबंधन से संबंधित सर्वर प्रणाली।
पर्यावरण के प्रमुख क्षेत्रों में AI के अनुप्रयोग
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन: AI प्रदूषकों की सटीक निगरानी तथा प्रदूषण स्तर के पूर्वानुमान के माध्यम से वायु गुणवत्ता प्रबंधन को सुदृढ़ बनाता है।
  • जल संसाधन प्रबंधन: AI जल गुणवत्ता, मात्रा आकलन तथा वितरण प्रबंधन को बेहतर बनाता है।
  • अपशिष्ट प्रबंधन: AI आधारित स्वचालित प्रणाली अपशिष्ट वर्गीकरण, पुनर्चक्रण तथा लैंडफिल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाती है।
  • जैव विविधता संरक्षण: AI प्रजाति पहचान, आवास मानचित्रण तथा वन्यजीव निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • कृषि: AI आधारित सटीक कृषि पद्धतियाँ फसल उत्पादन पूर्वानुमान, मृदा स्वास्थ्य निगरानी तथा सिंचाई प्रबंधन को बेहतर बनाती हैं।
  • जलवायु परिवर्तन शमन एवं अनुकूलन: AI जलवायु मॉडलिंग, नवीकरणीय ऊर्जा अनुकूलन तथा आपदा प्रबंधन में सहायक है।

उदाहरण: AI किफायती IoT आधारित जल सेवा वितरण प्रणालियों को सक्षम बना रहा है, जैसे “गाँव का पानी गाँव में – हर घर को नल से साफ जल” पहल, जिसमें स्मार्ट सेंसर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल गुणवत्ता एवं वितरण की निगरानी की जाती है।

वास्तविक समय जल गुणवत्ता निगरानी हेतु वेब पोर्टल: यहाँ क्लिक करें


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संशोधित किया गया : 20-03-2026